बीजापुर के पूर्व नक्सली अरविंद की नई शुरुआत: हर महीने 20,000 रुपये की कमाई
मां-बाप की मौत के बाद अरविंद बना था नक्सली, टॉप लीडरों का था संतरी, सरेंडर कर ट्रेनिंग ली, अब हर महीने इतनी कमाई
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
बीजापुर, छत्तीसगढ़ के अरविंद हेमला ने नक्सली जीवन छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। 22 साल की उम्र में सरेंडर करने के बाद, उसने राजमिस्त्री का काम सीखा और अब हर महीने 18,000 से 20,000 रुपये कमा रहा है। उसकी कहानी विकास और पुनर्वास का प्रतीक है।
- 01अरविंद हेमला ने नक्सली जीवन छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।
- 02सरेंडर के बाद उसने राजमिस्त्री का प्रशिक्षण लिया।
- 03अब वह हर महीने 18,000 से 20,000 रुपये कमा रहा है।
- 04अरविंद का बचपन अभावों में बीता और उसने माओवादी गतिविधियों में शामिल होने का निर्णय लिया।
- 05सरेंडर करने के बाद, वह पुनर्वास केंद्र में रहकर अपने भविष्य को नया आकार दे रहा है।
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बीजापुर, छत्तीसगढ़ के अरविंद हेमला की कहानी एक प्रेरणादायक उदाहरण है कि कैसे एक व्यक्ति नक्सली जीवन से बाहर निकलकर मुख्यधारा में लौट सकता है। अरविंद का जन्म एक गरीब परिवार में हुआ था और उसके माता-पिता की मौत के बाद वह अकेला हो गया। इस कठिन समय में, उसने माओवादी गतिविधियों की ओर रुख किया और संगठन में शामिल हो गया। अरविंद ने नक्सली संगठन के टॉप लीडरों की सुरक्षा में काम किया। हालांकि, गांव वालों के प्रोत्साहन पर, उसने 22 मार्च 2025 को सरेंडर करने का फैसला किया। पुनर्वास केंद्र में, उसने राजमिस्त्री का प्रशिक्षण लिया और अब वह तेलंगाना में रहकर हर महीने 18,000 से 20,000 रुपये कमा रहा है। अरविंद ने कहा कि हिंसा का रास्ता केवल डर और अनिश्चितता देता है और अब वह अपने भविष्य को सकारात्मक दिशा में ले जा रहा है।
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अरविंद की कहानी न केवल उसके लिए, बल्कि अन्य पूर्व नक्सलियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। यह दिखाता है कि कैसे पुनर्वास कार्यक्रमों से लोग अपने जीवन को नया आकार दे सकते हैं।
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