बच्चों की मालिश: आयुर्वेद में इसके महत्व और सही समय
आयुर्वेद में बच्चों की मालिश को क्यों माना जाता है जरूरी? जानें, जन्म के कितने दिनों बाद शुरू करें बच्चे की मालिश
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बच्चों की तेल से मालिश भारतीय परंपरा और आयुर्वेद में महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह न केवल शारीरिक विकास और मांसपेशियों को मजबूत करने में मदद करती है, बल्कि बच्चे की नींद और पाचन में भी सुधार लाती है। विशेषज्ञों के अनुसार, मालिश जन्म के 2-3 हफ्ते बाद शुरू करनी चाहिए।
- 01बच्चों की मालिश से शारीरिक विकास और मांसपेशियों की मजबूती में मदद मिलती है।
- 02मालिश से बच्चे की नींद में सुधार होता है और वह अधिक सक्रिय रहता है।
- 03हल्की मालिश से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और गैस जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
- 04मालिश के लिए सही तेल का चुनाव मौसम के अनुसार करना चाहिए।
- 05मालिश जन्म के 2-3 हफ्ते बाद शुरू करनी चाहिए।
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बच्चों की तेल से मालिश भारतीय परंपरा और आयुर्वेद में अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। यह न केवल बच्चे के शारीरिक विकास को सपोर्ट करती है, बल्कि मांसपेशियों को भी मजबूती प्रदान करती है। आयुर्वेद के अनुसार, अभ्यंग यानी तेल मालिश से शरीर का संतुलन बना रहता है। हल्की मालिश से रक्त संचार में सुधार होता है, जिससे पोषण सही तरीके से शरीर के विभिन्न हिस्सों तक पहुँचता है। इसके अलावा, मालिश से बच्चे को अच्छी नींद आती है, जो दिमाग के विकास के लिए आवश्यक है। पाचन तंत्र को आराम देने के लिए भी हल्की मालिश फायदेमंद होती है। नए माता-पिता को सलाह दी जाती है कि वे मालिश जन्म के 2-3 हफ्ते बाद शुरू करें और हमेशा हल्के हाथों से करें। मौसम के अनुसार तेल का चुनाव भी महत्वपूर्ण है, जैसे सर्दियों में तिल या सरसों का तेल और गर्मियों में नारियल तेल का उपयोग करना चाहिए।
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बच्चों की मालिश से उनके स्वास्थ्य और विकास में सुधार होता है, जो माता-पिता के लिए महत्वपूर्ण है।
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