झामुमो का असम में चाय बागान श्रमिकों के अधिकारों के लिए संघर्ष
असम की धरती से हेमंत सोरेन का हुंकार: "चाय बागान मजदूरों का शोषण अब और नहीं सहेगा झामुमो
Jagran
Image: Jagran
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम में चाय बागान श्रमिकों के शोषण के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने 250 रुपये की दैनिक मजदूरी को 'क्रूर मजाक' बताया और आदिवासी पहचान के संकट पर चिंता जताई। पार्टी अब असम में श्रमिकों के अधिकारों के लिए निर्णायक संघर्ष करने की योजना बना रही है।
- 01हेमंत सोरेन ने चाय बागान श्रमिकों के शोषण पर तीखा हमला किया।
- 02दैनिक मजदूरी 250 रुपये को 'क्रूर मजाक' बताया।
- 03आदिवासी समुदाय की पहचान के संकट पर चिंता व्यक्त की।
- 04झामुमो असम में श्रमिकों के अधिकारों के लिए सक्रियता बढ़ा रहा है।
- 05कल्पना सोरेन ने पार्टी के प्रति समर्थन की अपील की।
Advertisement
In-Article Ad
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने असम के चाय बागान श्रमिकों के अधिकारों के लिए एक जनसभा में अपनी आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि वर्तमान में चाय बागान श्रमिकों को मिल रही 250 रुपये की दैनिक मजदूरी एक क्रूर मजाक है। सोरेन ने श्रमिकों को चेतावनी दी कि चुनाव के समय दी जाने वाली मामूली आर्थिक सहायता उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के बजाय कमजोर रखने की साजिश है। उन्होंने असम में आदिवासी समुदाय की स्थिति पर भी चिंता जताई और कहा कि अन्य राज्यों में जहां आदिवासियों को संवैधानिक सुरक्षा मिली हुई है, वहीं असम में वे अपनी पहचान के लिए तरस रहे हैं। दूसरी ओर, झामुमो की स्टार प्रचारक कल्पना सोरेन ने तिनसुकिया जिले के मार्गेरिटा में जनसंपर्क किया और लोगों से झामुमो को वोट देने की अपील की। झामुमो का यह आक्रामक रुख संकेत दे रहा है कि पार्टी अब केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी राज्यों में भी आदिवासी पहचान और श्रमिक अधिकारों के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की रणनीति पर काम कर रही है।
Advertisement
In-Article Ad
झामुमो की सक्रियता से असम के चाय बागान श्रमिकों को उनके अधिकारों के लिए एक नई आवाज मिलेगी, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार की उम्मीद है।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि चाय बागान श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए झामुमो का प्रयास सफल होगा?
Connecting to poll...
More about झारखंड मुक्ति मोर्चा
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।

-1775465391155.webp)



