भोपाल मेट्रो: रोजाना खर्च 8 लाख, कमाई केवल 15 हजार, यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट
Bhopal Metro: रोजाना का खर्च 8 लाख, कमाई सिर्फ 15 हजार रुपए, 3 महीने में तीसरी बार घटे फेरे
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भोपाल मेट्रो, जो 20 दिसंबर 2025 को शुरू हुई, अब आर्थिक संकट का सामना कर रही है। रोजाना संचालन पर 8 लाख रुपये खर्च होते हैं, जबकि आमदनी केवल 15 हजार रुपये है। यात्रियों की संख्या घटकर 100-150 रह गई है, जिससे फेरे और संचालन समय में बदलाव किया गया है।
- 01भोपाल मेट्रो का रोजाना खर्च 8 लाख रुपये है।
- 02यात्रियों की संख्या घटकर 100-150 रह गई है।
- 03कमाई मात्र 13 से 15 हजार रुपये है।
- 04मेट्रो के फेरे घटाकर 9 कर दिए गए हैं।
- 05रूट विस्तार और बेहतर कनेक्टिविटी की आवश्यकता है।
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भोपाल मेट्रो, जो 20 दिसंबर 2025 को शुरू हुई थी, अब गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रही है। रोजाना इसके संचालन पर 8 लाख रुपये खर्च हो रहे हैं, जबकि आमदनी केवल 13 से 15 हजार रुपये तक सीमित है। यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट आई है, जो शुरुआत में 7 हजार थी, अब घटकर 100-150 रह गई है। इस कमी के कारण मेट्रो प्रबंधन को फेरे और संचालन समय में बदलाव करने पर मजबूर होना पड़ा है। पहले मेट्रो रोजाना 17 फेरे लगाती थी, जिसे अब घटाकर 9 कर दिया गया है। मेट्रो के सीमित रूट और कमजोर कनेक्टिविटी यात्रियों की कमी का मुख्य कारण है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मेट्रो रिहायशी इलाकों और प्रमुख बाजारों को नहीं जोड़ेगी, तब तक यह आम लोगों के लिए आकर्षक विकल्प नहीं बन पाएगी।
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यात्री संख्या में कमी से मेट्रो की आर्थिक स्थिति प्रभावित हो रही है, जिससे शहर के परिवहन विकल्पों की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।
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