रोहिंग्या और बांग्लादेशी महिलाओं और बच्चों की तस्करी करने वाले 9 आरोपियों को मिली कठोर सजा
रोहिंग्या-बांग्लादेशी महिलाओं और बच्चों की तस्करी के 9 आरोपियों को कठोर कारावास की सजा, अवैध रूप से पार कराते थे सीमा
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लखनऊ में विशेष न्यायालय ने रोहिंग्या और बांग्लादेशी महिलाओं और बच्चों की तस्करी के आरोप में 9 आरोपियों को 7 से 8 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। ये आरोपी अवैध रूप से सीमा पार कराकर पीड़ितों का शोषण करते थे।
- 019 आरोपियों को 7 से 8 साल की कठोर कारावास की सजा
- 02आरोपियों पर अलग-अलग जुर्माना भी लगाया गया
- 03मानव तस्करी का गिरोह भारत-बांग्लादेश सीमा पर सक्रिय था
- 04पीड़ितों का शोषण विवाह और काम दिलाने के नाम पर किया जाता था
- 05मुख्य आरोपी को गाजियाबाद रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया
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लखनऊ की विशेष अदालत ने रोहिंग्या और बांग्लादेशी महिलाओं और बच्चों की मानव तस्करी के मामले में 9 आरोपियों को 7 से 8 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। न्यायाधीश जैनेन्द्र कुमार पांडेय ने सभी दोषियों को अलग-अलग जुर्माने से भी दंडित किया। एटीएस के अनुसार, यह गिरोह विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों को बहला-फुसलाकर भारत लाता था, जहां उनका आर्थिक शोषण किया जाता था। मुख्य आरोपी मोहम्मद नूर को 26 जुलाई 2021 को गाजियाबाद रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया गया, जहां से कई रोहिंग्या महिलाओं और पुरुषों को मुक्त कराया गया। जांच में पता चला कि यह गिरोह त्रिपुरा स्थित सीमा क्षेत्र में सक्रिय था और पैसे लेकर लोगों को अवैध रूप से भारत में प्रवेश कराता था।
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इस फैसले से मानव तस्करी के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संदेश जाता है, जिससे स्थानीय समुदायों में सुरक्षा की भावना बढ़ेगी।
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