पश्चिम बंगाल चुनाव में कटे वोटरों की संख्या पर TMC की रणनीति
बंगाल चुनाव का गणित: कटे वोटरों के नाम जोड़ने की जद्दोजहद में TMC, इसी पर टिका नतीजा!
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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के पुनरीक्षण में 60 लाख नाम काटे गए हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) का ध्यान अब इन कटे हुए नामों को दोबारा जोड़ने पर है, क्योंकि यह चुनावी नतीजों पर प्रभाव डाल सकता है।
- 01पश्चिम बंगाल में कुल 7 करोड़ 4 लाख 59 हजार 284 मतदाता हैं, जो पहले 7 करोड़ 66 लाख थे।
- 0260 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची से काटे गए हैं, जिनमें से 44 लाख के डेटा उपलब्ध हैं।
- 03TMC का फोकस कटे हुए नामों को जोड़ने पर है, जिससे चुनावी नतीजे प्रभावित हो सकते हैं।
- 04चुनाव आयोग की जिम्मेदारी पर सवाल उठाए जा रहे हैं, विशेषकर न्यायिक प्रक्रिया के बोझ को लेकर।
- 05पैरा-मिलिट्री फोर्स की तैनाती और अधिकारियों के तबादले पर भी सियासी विवाद चल रहा है।
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पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान 60 लाख नाम काटे गए हैं, जिससे राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। वर्तमान में राज्य में कुल 7 करोड़ 4 लाख 59 हजार 284 मतदाता हैं, जबकि पहले यह संख्या लगभग 7 करोड़ 66 लाख थी। तृणमूल कांग्रेस (TMC) का पूरा ध्यान अब इन कटे हुए नामों को पुनः जोड़ने पर केंद्रित है, क्योंकि यह आगामी चुनावों के नतीजों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। TMC मंत्री शशि पांजा ने चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि वह अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं और न्यायिक अधिकारियों पर बोझ डाल रहे हैं। इसके अलावा, चुनाव आयोग द्वारा 506 अधिकारियों के तबादले और पैरा-मिलिट्री फोर्स की तैनाती पर भी विवाद बढ़ता जा रहा है। TMC का मानना है कि इस बार का चुनाव कटे और जुड़े नामों के गणित पर निर्भर करेगा।
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यदि TMC कटे हुए वोटरों के नाम जोड़ने में सफल नहीं होती है, तो यह चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है, जिससे पार्टी की स्थिति कमजोर हो सकती है।
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