सुप्रीम कोर्ट में पवन खेड़ा की जमानत याचिका पर बहस, तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल
असम में अपराध तो तेलंगाना हाईकोर्ट ने क्यों दी जमानत? पवन खेड़ा की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में बोले तुषार मेहता
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कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें असम सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पवन खेड़ा को असम हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए था।
- 01पवन खेड़ा की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई।
- 02तुषार मेहता ने तेलंगाना हाईकोर्ट के आदेश पर सवाल उठाया।
- 03तेलंगाना हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी।
- 04मेहता ने असम हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की सलाह दी।
- 05पवन खेड़ा ने अग्रिम जमानत की अवधि बढ़ाने की मांग की।
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा की जमानत याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई, जिसमें असम सरकार के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तीखी बहस की। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कथित अपराध असम में हुआ और एफआईआर भी वहीं दर्ज है, तो तेलंगाना हाईकोर्ट ने पवन खेड़ा को जमानत क्यों दी। मेहता ने कहा कि पवन खेड़ा को असम हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना चाहिए था, न कि किसी दूसरे राज्य के हाईकोर्ट से राहत मांगनी चाहिए। तेलंगाना हाईकोर्ट ने 10 अप्रैल को पवन खेड़ा को एक सप्ताह की ट्रांजिट अग्रिम जमानत दी थी, जिससे वे असम में दर्ज एफआईआर के मामले में नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकें। पवन खेड़ा ने सुप्रीम कोर्ट से अपनी अग्रिम जमानत की अवधि बढ़ाने की भी मांग की है।
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इस मामले का असर पवन खेड़ा की कानूनी स्थिति पर पड़ सकता है, जो असम में दर्ज एफआईआर से संबंधित है।
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