पंजाब में ड्रग और सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण शुरू, 65 लाख परिवारों तक पहुंचेगा
पंजाब में ड्रग और सामाजिक-आर्थिक सर्वे: 28 हजार कर्मी पहुंचेंगे 65 लाख परिवारों तक, पहचान रहेगी गोपनीय
Amar Ujala
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पंजाब, भारत में ड्रग और सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण शुरू हो गया है, जिसमें 28 हजार कर्मचारी 65 लाख परिवारों से जानकारी जुटाएंगे। यह सर्वे नशे की लत के प्रभाव और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन करेगा, और इसके लिए सरकार ने ₹150 करोड़ आवंटित किए हैं।
- 01सर्वे में 28 हजार कर्मचारी शामिल हैं।
- 02लगभग 65 लाख परिवारों से जानकारी एकत्र की जाएगी।
- 03सर्वे का उद्देश्य नशे की लत और सामाजिक-आर्थिक स्थिति का मूल्यांकन करना है।
- 04सरकार ने इस पहल के लिए ₹150 करोड़ आवंटित किए हैं।
- 05सर्वे तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य है।
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पंजाब, भारत में ड्रग और सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण की शुरुआत हो गई है, जिसमें 28 हजार कर्मचारी 65 लाख परिवारों से जानकारी एकत्र करेंगे। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य यह जानना है कि नशे की लत से कितने लोग प्रभावित हैं और उनके परिवारों की सामाजिक व आर्थिक स्थिति कैसी है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सर्वे के दौरान किसी भी व्यक्ति की पहचान उजागर न हो। यह सर्वे सरकार के 'युद्ध नशेयां विरुद्ध' अभियान को मजबूत करेगा और प्रभावित लोगों के पुनर्वास के लिए नीतिगत बदलाव में मदद करेगा। सर्वे में यह भी पता लगाया जाएगा कि कौन से मादक पदार्थ अधिक प्रचलित हैं और उनका समाज पर क्या असर पड़ रहा है। यह सर्वे पहले 11 गांवों में सफल ट्रायल के बाद अब एक अप्रैल से पूरे प्रदेश में लागू किया गया है, और इसे तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार ने इस पहल के लिए ₹150 करोड़ आवंटित किए हैं।
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इस सर्वेक्षण से नशे की लत से प्रभावित लोगों की पहचान और उनके पुनर्वास के लिए नीतिगत बदलाव में मदद मिलेगी।
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