मोहन भागवत ने राष्ट्र की समृद्धि को व्यक्तिगत प्रगति की कुंजी बताया
मोहन भागवत का संदेश: राष्ट्र की समृद्धि ही व्यक्तिगत प्रगति की कुंजी
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कोच्चि में 'बालगोकुलम' सम्मेलन में कहा कि व्यक्तिगत समृद्धि देश की समृद्धि और सुरक्षा से जुड़ी है। उन्होंने युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रेरित किया और करियर तथा राष्ट्र सेवा के बीच भ्रम को दूर करने की आवश्यकता पर बल दिया।
- 01राष्ट्र की समृद्धि व्यक्तिगत प्रगति की कुंजी है।
- 02व्यक्तिगत खुशहाली को राष्ट्र की सुरक्षा से अलग नहीं किया जा सकता।
- 03युवाओं को करियर और राष्ट्र सेवा के बीच भ्रम से बचने की सलाह दी गई।
- 04राष्ट्र निर्माण में सक्रिय योगदान देने की आवश्यकता पर जोर।
- 05भगवान कृष्ण को पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ कार्यक्रम की शुरुआत।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कोच्चि में 'बालगोकुलम' के दो दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि राष्ट्र की समृद्धि ही व्यक्तिगत प्रगति की कुंजी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि व्यक्तिगत खुशहाली को राष्ट्र की सुरक्षा और संपन्नता से अलग नहीं देखा जा सकता। भागवत ने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने करियर पर ध्यान केंद्रित करने के साथ-साथ राष्ट्र के विकास में भी योगदान दें। उन्होंने कहा, 'जब देश समृद्ध और सुरक्षित होता है, तो परिवार भी समृद्धि और सुरक्षा प्राप्त करते हैं।' कार्यक्रम की शुरुआत में उन्होंने भगवान कृष्ण को पुष्पांजलि अर्पित की और बच्चों के साथ संवाद किया। भागवत ने राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर जोर दिया।
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यह संदेश युवाओं को प्रेरित कर सकता है कि वे अपने करियर के साथ-साथ राष्ट्र की सेवा में भी योगदान दें।
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