महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की रहस्यमयी कथा: कैसे महादेव ने भक्तों की रक्षा की
Mahakaleshwar Jyotirlinga: किसे भस्म करने और किसे बचाने के लिए महादेव बने महाकाल? पढ़ें तीसरे ज्योतिर्लिंग की रहस्यमय कहानी
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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, जो उज्जैन, मध्य प्रदेश में स्थित है, की पौराणिक कथा में भगवान शिव ने भक्तों की रक्षा के लिए दुष्ट राक्षस दूषण का नाश किया। इस घटना के बाद महादेव यहां ज्योतिर्लिंग के रूप में स्थिर हुए, जिससे भक्तों को मृत्यु का भय समाप्त हो गया।
- 01महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग उज्जैन, मध्य प्रदेश में स्थित है और इसे काल का भी काल माना जाता है।
- 02दूषण नामक राक्षस ने शिव भक्तों को सताने का प्रयास किया था।
- 03महादेव का प्राकट्य दूषण के अत्याचार के खिलाफ भक्तों की रक्षा के लिए हुआ।
- 04महादेव की गर्जना से दूषण भस्म हो गया और भक्तों की रक्षा हुई।
- 05महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना भक्तों की प्रार्थना के बाद हुई।
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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, जो उज्जैन, मध्य प्रदेश में स्थित है, की कथा भक्तों की आस्था से जुड़ी हुई है। प्राचीन समय में, अवंतिका नगरी में एक धर्मनिष्ठ ब्राह्मण और उसके चार पुत्र भगवान शिव की भक्ति में लीन रहते थे। वहीं, दूषण नामक एक क्रूर राक्षस ने ब्रह्मा जी से त्रिदेव के समान शक्ति का वरदान प्राप्त किया और उसने अवंतिका के लोगों को पूजा-पाठ बंद करने का आदेश दिया। ब्राह्मण ने अपने पुत्रों के साथ महादेव की पूजा जारी रखी। जब दूषण ने ब्राह्मण के पुत्रों को मारने की धमकी दी, तब महादेव ने अपने रूप में प्रकट होकर दूषण का नाश किया। महादेव की गर्जना से दूषण भस्म हो गया और इसके बाद ब्राह्मण ने महादेव से प्रार्थना की कि वे उज्जैन में सदा वास करें। इस प्रकार, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की स्थापना हुई, जो भक्तों को मृत्यु के भय से मुक्त करता है।
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महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग की कथा भक्तों को प्रेरणा देती है और उनके विश्वास को मजबूत करती है।
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