शाहजहांपुर के नवाब बहादुर खान का मकबरा: ऐतिहासिक धरोहर की बदहाली
कभी संगमरमर से चमकता था मकबरा, आज टूटती दीवारें...जिसने बसाया शाहजहांपुर, उसी की विरासत बनी खंडहर!
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शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश में नवाब बहादुर खान का मकबरा, जो कभी संगमरमर से चमकता था, अब टूटने की कगार पर है। प्रशासन की अनदेखी के कारण यह ऐतिहासिक धरोहर अपनी पहचान खोती जा रही है, जिससे शहर की सांस्कृतिक विरासत पर खतरा मंडरा रहा है।
- 01नवाब बहादुर खान, शाहजहांपुर के संस्थापक, ने अफगान कबीलों को बसाने के लिए प्रेरित किया।
- 02उनका मकबरा मुगलकालीन चारबाग शैली में बना था, जो अब बदहाल हो गया है।
- 03प्रशासनिक लापरवाही के कारण मकबरे की दीवारें टूट रही हैं और संरचना में क्षति हो रही है।
- 04इतिहासकारों का मानना है कि जीर्णोद्धार पर ध्यान न देने पर आने वाली पीढ़ियों को नवाब का नाम केवल किताबों में मिलेगा।
- 05इस स्थल का विकास पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
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शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश में नवाब बहादुर खान का मकबरा, जो मुगलकालीन चारबाग शैली में बना था, अब अपनी भव्यता खो चुका है। नवाब बहादुर खान, जो अफगानिस्तान के दौड़जई कबीले से थे, ने 1647 में इस क्षेत्र को मुस्लिम शक्ति का केंद्र बनाने के लिए इस शहर की स्थापना की थी। उनका मकबरा कभी संगमरमर से चमकता था और शहर की सबसे ऊंची इमारत मानी जाती थी। लेकिन आज, इसकी दीवारें टूट रही हैं और नक्काशी से सजे गलियारों में चमगादड़ों का बसेरा है। प्रशासन की अनदेखी के कारण यह ऐतिहासिक धरोहर अपना अस्तित्व खोती जा रही है। इतिहासकारों का मानना है कि यदि जल्द ही जीर्णोद्धार पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाली पीढ़ियों को नवाब का नाम केवल किताबों में ही मिलेगा। इस स्थल का विकास न केवल सांस्कृतिक जिम्मेदारी है, बल्कि यह शहर के लिए पर्यटन के दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हो सकता है।
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यदि मकबरे का जीर्णोद्धार नहीं किया गया, तो यह शहर की सांस्कृतिक पहचान को खो देगा।
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