बैसाखी 2026: जानें इस पर्व के महत्व और विशेषताएँ
Baisakhi 2026: खुशियों और उल्लास से जुड़ी बैशाखी को मनाने से पहले जानें इससे जुड़ी 10 बड़ी बातें
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बैसाखी का पर्व सिखों के लिए महत्वपूर्ण है, जो हर साल वैशाख मास में मनाया जाता है। यह दिन किसानों के लिए फसल की कटाई और नए सौर वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है। विभिन्न क्षेत्रों में इसे अलग-अलग नामों से मनाया जाता है, जैसे असम में 'बोहाग बिहू' और बंगाल में 'पोइला बैशाख'।
- 01बैसाखी का पर्व सिखों के दसवें गुरु, गुरु गोबिंद सिंह की खालसा संप्रदाय की स्थापना का दिन है।
- 02यह पर्व मुख्य रूप से किसानों के लिए फसल की कटाई और नए सौर वर्ष की शुरुआत का प्रतीक है।
- 03उत्तर भारत में इसे मेष संक्रांति के रूप में मनाया जाता है, जिसमें लोग स्नान और दान करते हैं।
- 04बैसाखी का पर्व विभिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है।
- 05इस दिन दान का विशेष महत्व है, जिसमें किसान अपनी फसल का कुछ हिस्सा जरूरतमंदों को देते हैं।
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बैसाखी का पर्व हर साल वैशाख मास में मनाया जाता है, जो सिखों के लिए विशेष महत्व रखता है। यह दिन गुरु गोबिंद सिंह द्वारा खालसा संप्रदाय की स्थापना का प्रतीक है। पंजाब और हरियाणा में इसे धूमधाम से मनाया जाता है, जबकि उत्तर भारत में इसे मेष संक्रांति के रूप में मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने पवित्रता के लिए स्नान करते हैं और सूर्य देवता की पूजा करते हैं। विभिन्न राज्यों में इसे अलग-अलग नामों से जाना जाता है, जैसे असम में 'बोहाग बिहू' और बंगाल में 'पोइला बैशाख'। बैसाखी पर किसान अपनी फसल की कटाई का जश्न मनाते हैं और दान का विशेष महत्व होता है, जिसमें वे अपनी फसल का कुछ हिस्सा जरूरतमंदों को देते हैं।
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बैसाखी पर्व किसानों के लिए फसल की कटाई का समय होता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार होता है।
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