प्राइवेट स्कूलों की लूट: किताबों और यूनिफॉर्म के नाम पर अभिभावकों से वसूली का खुलासा
DNA: किताबों से लेकर यूनिफॉर्म को कैसे प्राइवेट स्कूलों ने बनाया कमाई का हथियार, ZEE NEWS का अभियान, DNA ने किया एक्सपोज
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भारत में प्राइवेट स्कूलों द्वारा किताबों और यूनिफॉर्म के नाम पर अभिभावकों से अत्यधिक वसूली की जा रही है। इस मुद्दे पर सरकारें कार्रवाई कर रही हैं, जिसमें उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश ने कदम उठाए हैं। अभिभावकों को अपनी शिकायतें दर्ज कराने के लिए कई कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं।
- 01प्राइवेट स्कूलों के खिलाफ अभिभावकों की शिकायतें बढ़ रही हैं।
- 02सरकारें प्राइवेट स्कूलों की किताबों और यूनिफॉर्म की कीमतों पर कार्रवाई कर रही हैं।
- 03अभिभावकों को अपनी शिकायतें दर्ज कराने के लिए कानूनी अधिकार हैं।
- 04प्राइवेट स्कूलों का यूनिफॉर्म बाजार लगभग ₹72,000 करोड़ का है।
- 05NCERT की किताबें पढ़ाना प्राइवेट स्कूलों के लिए अनिवार्य है, लेकिन अपवादों का फायदा उठाया जा रहा है।
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भारत में प्राइवेट स्कूलों द्वारा किताबों और यूनिफॉर्म के नाम पर अभिभावकों से वसूली का एक संगठित नेटवर्क चल रहा है। हाल ही में, ज़ी न्यूज़ के DNA कार्यक्रम ने इस मुद्दे को उजागर किया, जिससे देशभर में प्रतिक्रियाएं आईं। उत्तर प्रदेश सरकार ने प्राइवेट स्कूलों पर छापेमारी के निर्देश दिए हैं, जबकि मध्य प्रदेश ने किताब मेले लगाने की घोषणा की है। प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों की संख्या लगभग 25 करोड़ है, जिनमें से 10 करोड़ प्राइवेट स्कूलों में पढ़ते हैं। स्कूल यूनिफॉर्म का कारोबार लगभग ₹72,000 करोड़ का है और यह हर साल 9% की दर से बढ़ रहा है। हालांकि, NCERT की किताबें कक्षा 9 से 12 तक अनिवार्य हैं, लेकिन प्राइवेट स्कूल इस नियम का फायदा उठाकर महंगी किताबें बेच रहे हैं। अभिभावकों को अपनी शिकायतें दर्ज कराने के लिए कई कानूनी विकल्प उपलब्ध हैं, जैसे कि जिला शिक्षा अधिकारी और CBSE से शिकायत करना।
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यह मुद्दा लाखों अभिभावकों की आर्थिक स्थिति पर असर डाल रहा है, क्योंकि उन्हें महंगी किताबों और यूनिफॉर्म के लिए अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं।
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