राजस्थान की चांद बावड़ी: 9वीं शताब्दी की अद्भुत सीढ़ीदार संरचना
Rajasthan: 3,500 सीढ़ियों की रहस्यमयी भूलभुलैया, 9वीं शताब्दी में बनी चांद बावड़ी, जो आज भी कर देती है हैरान
Ndtv
Image: Ndtv
चांद बावड़ी, जो दौसा जिले के आभनेरी गांव में स्थित है, 9वीं शताब्दी की एक ऐतिहासिक धरोहर है। इस बावड़ी में लगभग 3500 सीढ़ियां हैं और यह गर्मियों में ठंडक प्रदान करती है। इसके पास स्थित हर्षत माता मंदिर इस स्थान के धार्मिक महत्व को और बढ़ाता है।
- 01चांद बावड़ी का निर्माण 9वीं शताब्दी में निकुंभ वंश के राजा चंदा ने करवाया था।
- 02इस बावड़ी में लगभग 3500 सीढ़ियां हैं, जो इसे एक भूलभुलैया जैसा रूप देती हैं।
- 03नीचे जाने पर तापमान 5-6 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा हो जाता है।
- 04यह बावड़ी हर्षत माता को समर्पित है, जो प्रसन्नता और खुशी की देवी मानी जाती हैं।
- 05चांद बावड़ी एक सामुदायिक स्थल भी थी, जहां लोग मिलते-जुलते थे।
Advertisement
In-Article Ad
राजस्थान के दौसा जिले के आभनेरी गांव में स्थित चांद बावड़ी एक अद्भुत ऐतिहासिक धरोहर है, जिसका निर्माण 9वीं शताब्दी में निकुंभ वंश के राजा चंदा ने करवाया था। यह बावड़ी 3500 सीढ़ियों की अनोखी संरचना के लिए जानी जाती है, जो इसे भूलभुलैया जैसा रूप देती है। इसके चारों ओर सीढ़ियों की कतारें हैं और एक भव्य तीन मंजिला मंडप भी है। चांद बावड़ी का तापमान नीचे जाने पर 5-6 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा हो जाता है, जिससे यह गर्मियों में ठंडी शरणस्थली बन जाती है। इसके पास ही स्थित प्राचीन हर्षत माता मंदिर इस स्थान का धार्मिक महत्व बढ़ाता है। पहले यह बावड़ी केवल पानी का स्रोत नहीं थी, बल्कि एक सामुदायिक स्थल भी थी, जहां यात्री और व्यापारी आराम करते थे। आभनेरी गांव तक पहुंचने के लिए जयपुर से दौसा और गूलर चौराहा होते हुए यात्रा की जा सकती है।
Advertisement
In-Article Ad
चांद बावड़ी न केवल एक ऐतिहासिक धरोहर है, बल्कि यह स्थानीय पर्यटन को भी बढ़ावा देती है, जिससे गांव के लोगों की आय में सुधार हो सकता है।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण आवश्यक है?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।