डॉ. प्रमोद शर्मा ने भारत नाम का महत्व बताया
अपने देश को इंडिया नहीं, भारत बोले और लिखें : डॉ. प्रमोद
Amar Ujala
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आगरा रोड पर आयोजित एक गोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के डॉ. प्रमोद शर्मा ने भारतीय संस्कृति और भाषा के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हमें अपने देश को 'इंडिया' नहीं, बल्कि 'भारत' कहना और लिखना चाहिए।
- 01डॉ. प्रमोद शर्मा ने भारतीय संस्कृति की समृद्ध परंपराओं पर जोर दिया।
- 02उन्होंने 'इंडिया' के बजाय 'भारत' शब्द के उपयोग की अपील की।
- 03हिंदी भाषा में निमंत्रण पत्र छपवाने का सुझाव दिया।
- 04गोष्ठी में कई प्रमुख शिक्षाविद और समाजसेवी उपस्थित थे।
- 05पश्चिमी सभ्यता की तुलना में भारतीय परंपरा को महत्व दिया।
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आगरा रोड स्थित एक होटल में आयोजित गोष्ठी में डॉ. प्रमोद शर्मा ने भारतीय संस्कृति और भाषा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमें अपने देश को 'इंडिया' नहीं, बल्कि 'भारत' कहना और लिखना चाहिए। डॉ. शर्मा ने भारतीय परिवार की समृद्ध परंपरा की चर्चा करते हुए कहा कि पश्चिमी सभ्यता में केवल अंकल और आंटी का रिश्ता रह जाता है, जबकि भारतीय संस्कृति में चाचा, ताऊ, मामा, और बाबा जैसे रिश्ते महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने शुभ विवाह जैसे अवसरों पर निमंत्रण पत्रों को हिंदी में छपवाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। इस गोष्ठी में टीआर कॉलेज की प्रधानाचार्या डॉ. लकी गुप्ता, विजडम पब्लिक स्कूल की प्रबंधक प्रीति गुप्ता, और अन्य प्रमुख शिक्षाविद मौजूद थे।
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