बिहार की पारंपरिक मिठाइयाँ: अनरसा और गुलगुला
बिहार का स्वाद: गयाजी की पहली मिठाई है 'अनरसा', सीमांचल में बिहारी डोनट 'गुलगला' है फेमस
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बिहार की मिठाइयाँ जैसे 'अनरसा' और 'गुलगुला' न केवल स्थानीय परंपराओं का हिस्सा हैं, बल्कि अब अन्य क्षेत्रों में भी लोकप्रिय हो रही हैं। अनरसा, विशेष रूप से गया और जहानाबाद में बनता है, जबकि गुलगुला सीमांचल क्षेत्र का प्रसिद्ध पकवान है।
- 01अनरसा का गहरा नाता गया के पुरोहित समाज से है।
- 02गुलगुला, जिसे बिहारी डोनट कहा जाता है, अररिया में प्रसिद्ध है।
- 03अनरसा बनाने में पुराने अरवा चावल और गुड़ का उपयोग होता है।
- 04गुलगुला बनाने की विधि सरल और सामूहिक रूप से की जाती है।
- 05इन मिठाइयों का महत्व त्योहारों और पारिवारिक आयोजनों में है।
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बिहार की मिठाइयाँ, जैसे 'अनरसा' और 'गुलगुला', स्थानीय संस्कृति और परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अनरसा, जो गया और जहानाबाद में विशेष रूप से बनता है, पुरोहित समाज से जुड़ा हुआ है और इसे शादी-ब्याह जैसे आयोजनों में सौगात के रूप में भेजा जाता है। इसकी मुख्य सामग्री में पुराने अरवा चावल, गुड़, और पोस्ता दाना शामिल हैं। वहीं, गुलगुला, जिसे बिहारी डोनट कहा जाता है, अररिया क्षेत्र में प्रसिद्ध है। इसे बनाने के लिए गेहूं का आटा, गुड़, सौंफ और इलायची का उपयोग होता है। यह मिठाई सस्ती और आसानी से बनने वाली है, जिसे महिलाएं सामूहिक रूप से बनाती हैं। दोनों मिठाइयाँ न केवल स्वाद में अद्वितीय हैं, बल्कि बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर का भी प्रतीक हैं।
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ये मिठाइयाँ स्थानीय त्योहारों और पारिवारिक समारोहों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
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