अमेरिका-ईरान वार्ता विफल, कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने की आशंका
US-Iran डील टूटते ही क्रूड ऑयल के 100 डॉलर पार जाने की चिंता, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और रुपया पर क्या होगा असर?
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अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई, जिससे कच्चे तेल की कीमतें $100 के पार जाने की संभावना बढ़ गई है। इस स्थिति का भारतीय रुपये और महंगाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि शेयर बाजार में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिलेगा।
- 01अमेरिका-ईरान वार्ता विफल, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी की आशंका
- 02कच्चे तेल की कीमतें $100 के पार जा सकती हैं
- 03भारतीय रुपये में अस्थिरता और महंगाई बढ़ने की संभावना
- 04शेयर बाजार में 3-5% की गिरावट की संभावना
- 05ऊर्जा कंपनियों को लाभ और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को नुकसान हो सकता है
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अमेरिका और ईरान के बीच इस्लामाबाद में लगभग 21 घंटे तक चली शांति वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि वाशिंगटन ने अपना अंतिम प्रस्ताव दिया है, जबकि ईरान ने और चर्चा की आवश्यकता जताई है। इस विफलता ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में हलचल पैदा कर दी है, और विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतें $100 के पार जा सकती हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आपूर्ति में अनिश्चितता बढ़ गई है। भारतीय शेयर बाजार में 3-5% की गिरावट की संभावना जताई जा रही है, जबकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों और विमानन क्षेत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वहीं, ऊर्जा कंपनियों को इस स्थिति से लाभ हो सकता है। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से घरेलू महंगाई पर असर पड़ेगा, जिससे भारतीय रुपये में दबाव और अस्थिरता देखने को मिल सकती है। हालांकि, यह वार्ता विफलता कूटनीति के दरवाजे को पूरी तरह बंद नहीं करती है।
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कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि से घरेलू महंगाई बढ़ सकती है, जिससे आम लोगों के लिए जीवन यापन महंगा हो जाएगा।
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