शेखपुरा के किसान ने बायोगैस यूनिट से LPG किल्लत का किया सामना
LPG किल्लत की खबर के बीच किसान का बायोगैस यूनिट चर्चाओं में, किफायती तरीके कर रहे रसोई और खेती
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शेखपुरा जिले, बिहार के मौलानगर गांव के किसान कृष्णदेव यादव ने बायोगैस यूनिट स्थापित कर LPG गैस की किल्लत से निजात पाई है। उन्होंने कम लागत में गोबर गैस का उपयोग कर न केवल रसोई को आत्मनिर्भर बनाया, बल्कि जैविक खेती को भी बढ़ावा दिया है।
- 01कृषि और रसोई के लिए बायोगैस यूनिट का उपयोग
- 02कम लागत में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
- 03गोबर गैस से जैविक खेती को बढ़ावा
- 04गांव में स्वच्छता और पर्यावरण में सुधार
- 05अन्य गांवों के लिए प्रेरणा का स्रोत
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शेखपुरा जिले, बिहार के मौलानगर गांव के किसान कृष्णदेव यादव ने LPG गैस की किल्लत के बीच एक बायोगैस यूनिट स्थापित किया है। 15 हजार रुपए की लागत से उन्होंने पांच यूनिट बनाए हैं, जिससे उनके परिवार को रसोई गैस की समस्या का सामना नहीं करना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि गोबर गैस का उपयोग न केवल रसोई के लिए फायदेमंद है, बल्कि जैविक खेती को भी बढ़ावा दे रहा है। गोबर के अवशिष्ट का प्रबंधन कर उन्होंने खाद मुक्त खेती को संभव बनाया है। इससे गांव में स्वच्छता भी बढ़ी है और गोबर तथा कचरे का उपयोग ऊर्जा स्रोत में किया जा रहा है। यह पहल अब आसपास के गांवों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है। अगर अधिक लोग बायोगैस का उपयोग करें, तो गैस सिलेंडर पर निर्भरता कम हो सकती है।
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बायोगैस यूनिट से ग्रामीण परिवारों को LPG गैस की किल्लत से राहत मिली है, जिससे उनका जीवन स्तर सुधर रहा है।
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