यूनिफॉर्म सिविल कोड: बीजेपी सरकारों की योजनाओं पर मुस्लिम संगठनों की आपत्ति
"UCC संविधान की मूल भावना के खिलाफ", फिर क्यों थोप रही हैं बीजेपी सरकारें?
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गुजरात विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल पारित होने के बाद, मुस्लिम संगठनों ने इसे संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन मानते हुए विरोध जताया है। इस मुद्दे पर राजनीतिक दृष्टिकोण से भी बहस तेज हो गई है।
- 01UCC का विरोध धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन के रूप में किया जा रहा है।
- 02ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इसे संविधान की भावना के खिलाफ बताया।
- 03UCC को लागू करने की योजना कई बीजेपी शासित राज्यों में है।
- 04इस मुद्दे पर केवल मुस्लिम समुदाय ही नहीं, अन्य धार्मिक और सामाजिक समूह भी एकजुट हैं।
- 05सरकार से अपील की गई है कि इस फैसले को वापस लिया जाए।
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गुजरात विधानसभा में हाल ही में पारित यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) बिल ने देश में एक बार फिर बहस को तेज कर दिया है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और अन्य मुस्लिम संगठनों ने इस बिल का विरोध करते हुए इसे संविधान की मूल भावना के खिलाफ बताया है। उनका कहना है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है और इसे लागू करने का अधिकार राज्यों को नहीं है। UCC को लागू करने की योजना कई बीजेपी शासित राज्यों में चल रही है, जिसमें असम और राजस्थान शामिल हैं। बोर्ड ने चेतावनी दी है कि यदि आवश्यक हुआ तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। इसके अलावा, उन्होंने सरकार से अपील की है कि इस फैसले को वापस लिया जाए और सभी धर्मों के बीच बातचीत के माध्यम से समाधान निकाला जाए। इस मुद्दे पर केवल मुस्लिम समुदाय ही नहीं, बल्कि सिख, क्रिश्चियन, दलित और ओबीसी वर्ग के लोग भी उनके साथ खड़े हैं।
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UCC के लागू होने से विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच विवाद बढ़ सकता है और धार्मिक पहचान को खतरा हो सकता है।
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