महिला आरक्षण बिल में संशोधन: सरकार की योजना और विपक्ष की प्रतिक्रिया
सरकार Vs विपक्ष की खींचतान के बीच महिला आरक्षण बिल में संशोधन से किसे फायदा, जान लीजिए
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भारत की सरकार ने महिला आरक्षण कानून 2023 में संशोधन की योजना बनाई है, जिसमें 2029 से लागू होने वाले नए आंकड़ों के आधार पर लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों की संख्या बढ़ाने का प्रस्ताव है। विपक्ष इसे आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़कर देख रहा है।
- 01महिला आरक्षण बिल में संशोधन 2029 से लागू होगा।
- 02सरकार सीटों की संख्या 50% बढ़ाने की योजना बना रही है।
- 03विपक्ष इसे चुनावी लाभ के लिए देख रहा है।
- 04कांग्रेस और अन्य दलों ने महिला आरक्षण में पिछड़ी जातियों के लिए आरक्षण की मांग की है।
- 05संविधान संशोधन विधेयक को पारित करने के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी।
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भारत की सरकार ने महिला आरक्षण कानून 2023 में संशोधन का प्रस्ताव रखा है, जिसे 2029 से लागू करने की योजना है। केन्द्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि इस संशोधन के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में सीटों की संख्या में 50% की वृद्धि की जाएगी। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में लोकसभा सीटों की संख्या 80 से बढ़कर 120 हो जाएगी। विपक्षी दलों ने इस प्रस्ताव को आगामी विधानसभा चुनावों से जोड़कर देखा है, और कांग्रेस सांसद राजीव शुक्ला ने इसे राजनीतिक लाभ के लिए उठाया गया कदम बताया है। समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने भी पिछड़ी जातियों की महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग की है। यह संविधान संशोधन विधेयक है, जिसके पारित होने के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी, और चर्चा के दौरान विपक्ष इसे चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश करेगा।
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महिला आरक्षण बिल में संशोधन से महिला मतदाताओं पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा, जिससे राजनीतिक दलों को आगामी चुनावों में महिलाओं का समर्थन प्राप्त हो सकता है।
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