पाकिस्तान की 'पीस ब्रोकर' बनने की कोशिश नाकाम, ईरान ने खारिज की मध्यस्थता
पाकिस्तान बनने चला था चौधरी, अब हो गई फजीहत, 'पीस ब्रोकर' बनने की कोशिश नाकाम, UAE ने भी दिया झटका
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पाकिस्तान की ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता की कोशिशें विफल हो गई हैं, जब ईरान ने इस्लामाबाद में बातचीत से इनकार कर दिया। इसके साथ ही, पाकिस्तान को संयुक्त अरब अमीरात से 3.5 अरब डॉलर का कर्ज लौटाने का भी दबाव है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति और बिगड़ सकती है।
- 01ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता को खारिज किया।
- 02पाकिस्तान की कूटनीतिक साख पर सवाल उठे हैं।
- 03संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान से 3.5 अरब डॉलर की तत्काल वापसी की मांग की।
- 04पाकिस्तान की 'पीस ब्रोकर' बनने की कोशिशें विफल रहीं।
- 05पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है।
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पाकिस्तान की कोशिशें, जो उसने अमेरिका और ईरान के बीच 'शांतिदूत' बनने के लिए की थीं, अब पूरी तरह विफल होती नजर आ रही हैं। ईरान ने इस्लामाबाद में अमेरिकी अधिकारियों के साथ किसी भी बैठक से इनकार कर दिया है और अमेरिका द्वारा रखी गई युद्धविराम की 15 शर्तों को अस्वीकार कर दिया है। इसके जवाब में, ईरान ने अपनी 5 शर्तें रखी हैं, जिन पर अमेरिका सहमत नहीं है। इस स्थिति के चलते तुर्की और मिस्र नए मध्यस्थ विकल्प तलाश रहे हैं। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में कहा था कि इस्लामाबाद अमेरिका और ईरान के बीच सार्थक बातचीत कराने के लिए तैयार है, लेकिन ईरान के इनकार ने पाकिस्तान की कूटनीतिक महत्वाकांक्षा को बड़ा झटका दिया है। इसके अलावा, पाकिस्तान को संयुक्त अरब अमीरात से 3.5 अरब डॉलर का कर्ज लौटाने का भी दबाव है, जिससे उसकी आर्थिक स्थिति और जटिल हो सकती है।
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पाकिस्तान को UAE से कर्ज लौटाने के कारण उसकी विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे आर्थिक संकट और गहरा हो सकता है।
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