हरियाणा में गेहूं की खरीद में देरी, मौसम और कटाई की समस्या
खराब मौसम और अधूरी कटाई का असर, मंडियों तक नहीं पहुंचा गेहूं
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हरियाणा के किसानों के लिए गेहूं की सरकारी खरीद प्रक्रिया में देरी हो रही है, क्योंकि खराब मौसम और अधूरी कटाई के कारण फसल मंडियों तक नहीं पहुंची है। सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹2585 प्रति क्विंटल निर्धारित किया है, लेकिन अब तक केवल कागजों पर ही खरीद प्रक्रिया चल रही है।
- 01हरियाणा में गेहूं की खरीद 1 अप्रैल से शुरू होनी थी, लेकिन फसल मंडियों तक नहीं पहुंची।
- 02खराब मौसम और कटाई में देरी के कारण मंडियों में गेहूं की आवक प्रभावित हुई है।
- 03सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹2585 प्रति क्विंटल निर्धारित किया है।
- 04किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
- 0522 हजार से अधिक किसान इस साल गेहूं बेचने के लिए पंजीकरण करवा चुके हैं।
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हरियाणा में गेहूं की सरकारी खरीद प्रक्रिया 1 अप्रैल से शुरू हो चुकी है, लेकिन अब तक मंडियों में गेहूं का एक दाना भी नहीं पहुंचा है। खराब मौसम, तेज आंधी और बेमौसम बारिश ने फसल की कटाई को प्रभावित किया है, जिससे किसान मंडियों का रुख करने से बच रहे हैं। इस साल सरकार ने गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य ₹2585 प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। किसानों की सुविधा के लिए कई प्रमुख मंडियों में खरीद केंद्र बनाए गए हैं। खरीद प्रक्रिया को सुचारू रूप से चलाने की जिम्मेदारी हैफेड, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और हरियाणा वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन जैसी एजेंसियों को सौंपी गई है। इस बार गेहूं की खरीद का तरीका सरसों की खरीद की तरह रखा गया है, जिसमें किसानों को पहले 'मेरी फसल मेरा ब्योरा' पोर्टल पर पंजीकरण कराना होगा। अब तक 22 हजार से अधिक किसान अपना पंजीकरण करवा चुके हैं। प्रशासन ने किसानों को सलाह दी है कि वे अपनी फसल को अच्छी तरह से सुखाकर और साफ करके ही मंडियों में लाएं।
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किसानों को अपनी फसल बेचने में कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उनकी आय प्रभावित हो रही है।
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