झारखंड की मुसर्रत खातून ने स्ट्रॉबेरी खेती से बनाई नई पहचान
धान-मक्के की खेती छोड़ मुसर्रत खातून बन गई स्ट्रोबेरी दीदी; झारखंड की महिला ने लिखी सफता की कहानी
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झारखंड के जामताड़ा जिले की मुसर्रत खातून ने पारंपरिक धान और मक्के की खेती छोड़कर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की है। उन्होंने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी से प्रशिक्षण लेकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया और अब वे स्थानीय बाजार में प्रेरणा स्रोत बन गई हैं।
- 01मुसर्रत खातून ने पारंपरिक खेती छोड़कर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की।
- 02उन्होंने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी से प्रशिक्षण लिया।
- 03स्ट्रॉबेरी की खेती से उनकी आमदनी में सुधार हुआ है।
- 04उनकी सफलता ने अन्य किसानों और महिलाओं को भी प्रेरित किया है।
- 05मुसर्रत की कहानी बदलाव और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।
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झारखंड के जामताड़ा जिले की मुसर्रत खातून ने पारंपरिक धान और मक्के की खेती को छोड़कर स्ट्रॉबेरी की खेती में सफलता प्राप्त की है। नारायणपुर के गोकुला गांव की रहने वाली मुसर्रत अब 'स्ट्रॉबेरी दीदी' के नाम से जानी जाती हैं। उन्होंने झारखंड स्टेट लाइवलीहुड प्रमोशन सोसाइटी (JSLPS) से जुड़कर प्रशिक्षण लिया और सखी मंडल की सदस्य बनकर स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। मुसर्रत ने बताया कि पहले वे केवल धान-मक्के की खेती करती थीं, लेकिन प्रशिक्षण के बाद उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। उनकी मेहनत से न केवल उनकी आमदनी बढ़ी है, बल्कि स्थानीय बाजार में स्ट्रॉबेरी की मांग भी बढ़ी है। मुसर्रत की सफलता ने अन्य किसानों और महिलाओं को भी इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया है। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन और हौसले से बदलाव संभव है।
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मुसर्रत की सफलता से स्थानीय महिलाएं और किसान आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।
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