पायल नाग ने पैरा आर्चरी में गोल्ड मेडल जीतकर साबित किया हौसले का जादू
हाथ-पैर खोए, हिम्मत नहीं... पायल ने दुनिया को दिखाया हौसले की ताकत
Aaj Tak
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18 वर्षीय पायल नाग, जो ओडिशा के बालांगिर की निवासी हैं, ने बैंकॉक में वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज 2026 के फाइनल में गोल्ड मेडल जीतकर अपनी अद्वितीय यात्रा को पूरा किया। उन्होंने अपनी आइडल शीतल देवी को हराकर यह सफलता हासिल की, जो उनके अदम्य हौसले का प्रतीक है।
- 01पायल नाग ने बैंकॉक में गोल्ड मेडल जीता, जो उनकी कठिनाइयों पर विजय का प्रतीक है।
- 02उन्होंने बचपन में एक हादसे में अपने दोनों हाथ और पैर खो दिए थे।
- 03पायल ने अनाथालय में रहते हुए ड्रॉइंग शुरू की और आर्चरी में प्रशिक्षण प्राप्त किया।
- 04कोच कुलदीप वेदवान ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें ट्रेनिंग के लिए बुलाया।
- 05पायल की जीत ने उन्हें दुनिया की पहली क्वाड्रूपल एम्पुटी पैरा आर्चर बना दिया।
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ओडिशा के बालांगिर की 18 वर्षीय पायल नाग ने बैंकॉक में आयोजित वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज 2026 के फाइनल में गोल्ड मेडल जीतकर एक प्रेरणादायक कहानी पेश की है। पायल ने अपने दोनों हाथ और पैर एक हादसे में खो दिए थे, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी। अनाथालय में रहते हुए उन्होंने मुंह से ड्रॉइंग करना सीखा और बाद में जम्मू-कश्मीर के कटरा स्थित आर्चरी अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त किया। कोच कुलदीप वेदवान ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और उन्हें आर्चरी में प्रशिक्षित किया। फाइनल में, पायल ने अपनी आइडल शीतल देवी को 139-136 से हराकर गोल्ड मेडल जीता। उनकी यह जीत न केवल व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह दर्शाती है कि हौसले और मेहनत से किसी भी चुनौती का सामना किया जा सकता है।
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पायल नाग की कहानी ने समाज में विकलांगता के प्रति जागरूकता बढ़ाई है और यह प्रेरणा देती है कि कठिनाइयों का सामना करके भी सफलता प्राप्त की जा सकती है।
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