धर्मशाला में पेड़ों के कटान से बढ़ रहा है प्राकृतिक संकट: नाथू राम
पेड़ों के अंधाधुंध कटान से बढ़ रहा बड़ी त्रासदी का खतरा : नाथू राम
Amar Ujala
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नाथू राम चौहान, जो 'जस्टिस फॉर देव आत्मा हिमालय' के संस्थापक हैं, ने धर्मशाला में चेतावनी दी है कि पेड़ों के अंधाधुंध कटान और पर्यावरण असंतुलन के कारण कांगड़ा जिले में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि वे जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
- 01नाथू राम चौहान ने पेड़ों के कटान को लेकर चेतावनी दी है।
- 02कांगड़ा जिले में बादल फटने की घटनाएं कम ऊंचाई पर भी हो रही हैं।
- 031905 के विनाशकारी भूकंप का खतरा फिर से बढ़ रहा है।
- 04फोरलेन निर्माण के कारण प्राकृतिक जल स्रोत नष्ट हो रहे हैं।
- 05प्रशासन को जनता की सुरक्षा को विकास से ऊपर रखना चाहिए।
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धर्मशाला में 'जस्टिस फॉर देव आत्मा हिमालय' के संस्थापक नाथू राम चौहान ने पेड़ों के अंधाधुंध कटान और पर्यावरण से छेड़छाड़ के चलते कांगड़ा जिले में बढ़ते संकट की चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि पहले बादल फटने की घटनाएं ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होती थीं, लेकिन अब यह घटनाएं 2 से 3 हजार मीटर की ऊंचाई पर भी देखने को मिल रही हैं। उन्होंने 1905 के विनाशकारी भूकंप का जिक्र करते हुए कहा कि यदि प्रशासन और सरकार समय रहते नहीं चेते, तो कांगड़ा एक बड़ी त्रासदी का गवाह बन सकता है। चौहान ने फोरलेन निर्माण से होने वाले नुकसान पर भी चिंता जताई, जिसमें मिट्टी को सुरक्षित स्थानों पर डंप करने के बजाय खड्डों में बहाया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से अपील की कि संवेदनशील क्षेत्रों में जनता की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाए।
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यदि प्रशासन ने उचित कदम नहीं उठाए, तो कांगड़ा जिले में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा बढ़ सकता है, जिससे स्थानीय निवासियों की सुरक्षा प्रभावित होगी।
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