क्या जिनपिंग की रणनीति से ताइवान बिना युद्ध के चीन के साथ जुड़ जाएगा?
बिना जंग ही ताइवान जीत जाएंगे जिनपिंग? विपक्षी नेता को चीन बुलाकर खेल बदलने की कोशिश
Aaj Tak
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चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान की विपक्षी पार्टी कुओमितांग (KMT) की नेता चेंग ली-वुन से बीजिंग में मुलाकात की। यह बैठक एशिया की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देती है, जिसमें चीन ताइवान को बिना युद्ध के अपने साथ लाने की कोशिश कर रहा है।
- 01चीन की रणनीति में 'सॉफ्ट पावर' का उपयोग शामिल है।
- 02चेंग ली-वुन ने शांति की आवश्यकता पर जोर दिया।
- 03ताइवान की सत्तारूढ़ पार्टी ने इस प्रक्रिया पर संदेह जताया।
- 04चीन ने ताइवान के आसपास सैन्य गतिविधियों को बढ़ाया है।
- 05यह मुलाकात ताइवान के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत है।
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बीजिंग में हुई मुलाकात में, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ताइवान की विपक्षी पार्टी कुओमितांग (KMT) की नेता चेंग ली-वुन से बातचीत की। यह मुलाकात पिछले एक दशक में ताइवान की किसी प्रमुख विपक्षी नेता का चीन दौरा करने का पहला उदाहरण है। जिनपिंग ने कहा कि 'दोनों तरफ के लोग एक होंगे', जो चीन के लंबे समय से चले आ रहे रुख को दर्शाता है। चेंग ने शांति की बात करते हुए कहा कि ताइवान स्ट्रेट को टकराव का केंद्र नहीं बनना चाहिए। हालांकि, ताइवान की सत्तारूढ़ पार्टी ने इस प्रक्रिया को संदिग्ध बताया है, यह आरोप लगाते हुए कि चीन सैन्य दबाव बना रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अब एक दोहरी रणनीति पर काम कर रहा है, जिसमें सैन्य दबाव और राजनीतिक संवाद दोनों शामिल हैं। इस मुलाकात को ताइवान के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।
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यदि चीन की रणनीति सफल होती है, तो ताइवान के नागरिकों को बिना युद्ध के अधिक स्थिरता और शांति मिल सकती है।
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