भारत में तेल की कीमतें बढ़ने की संभावना, कंपनियों को होगा भारी नुकसान
महंगा होने वाला है तेल! कंपनियों को वसूलना है नुकसान तो 35 रुपये तक बढ़ाने होंगे दाम, चुनाव बाद लगेगा झटका
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भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतें स्थिर रहने के बावजूद, तेल कंपनियों को प्रति लीटर 18 रुपये और 35 रुपये का नुकसान हो रहा है। चुनाव बाद कीमतों में वृद्धि की संभावना है, जिससे उपभोक्ताओं पर असर पड़ेगा।
- 01पेट्रोल पर कंपनियों को 18 रुपये और डीजल पर 35 रुपये का नुकसान हो रहा है।
- 02कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव से कंपनियों को भारी घाटा हो रहा है।
- 03चुनाव के बाद ईंधन की कीमतों में वृद्धि की संभावना है।
- 04भारत की कच्चे तेल की जरूरत का 88% आयात किया जाता है।
- 05सरकारी उत्पाद शुल्क में कटौती के बावजूद कंपनियों को नुकसान की भरपाई नहीं हो रही।
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भारत में पेट्रोलियम कंपनियों को कच्चे तेल की बढ़ती लागत के कारण भारी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। वर्तमान में, कंपनियों को पेट्रोल पर 18 रुपये और डीजल पर 35 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। सरकारी तेल कंपनियां, जैसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL), ने पिछले एक साल से कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 135-165 डॉलर प्रति बैरल के बीच उतार-चढ़ाव कर रही हैं, जिससे कंपनियों का घाटा बढ़ रहा है। चुनावों के बाद, खासकर पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में, ईंधन की खुदरा कीमतों में वृद्धि की संभावना है। यदि उत्पाद शुल्क को पूरी तरह से समाप्त कर दिया जाए, तो भी कंपनियों के नुकसान की भरपाई नहीं होगी।
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यदि तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो उपभोक्ताओं को ईंधन के लिए अधिक भुगतान करना होगा, जिससे दैनिक खर्च में वृद्धि होगी।
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