हिमाचल प्रदेश में ग्लेशियर झीलों का खतरा: वैज्ञानिकों का अध्ययन
Himachal: हिमाचल के ग्लेशियरों में बनी झीलों का खतरा भांपेंगे वैज्ञानिक, इन बिंदुओं पर होगा अध्ययन
Amar Ujala
Image: Amar Ujala
हिमाचल प्रदेश में पार्वती घाटी और लाहौल-स्पीति में स्थित ग्लेशियर झीलों के संभावित खतरों का अध्ययन किया जाएगा। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने चार उच्च जोखिम वाली झीलों की पहचान की है, जिन पर अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने की दिशा में काम शुरू किया गया है।
- 01ग्लेशियर झीलों के संभावित खतरों का अध्ययन किया जाएगा।
- 02राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने चार उच्च जोखिम वाली झीलों की पहचान की है।
- 03अर्ली वार्निंग सिस्टम स्थापित करने की दिशा में काम चल रहा है।
- 04विज्ञानियों द्वारा झीलों के आकार में बदलावों का आकलन किया जाएगा।
- 05रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी ताकि भविष्य में आपदाओं से निपटने की रणनीति तैयार की जा सके।
Advertisement
In-Article Ad
हिमाचल प्रदेश के कुल्लू, मंडी और लाहौल-स्पीति जिलों में स्थित ग्लेशियर झीलों के संभावित खतरों का अध्ययन शुरू किया गया है। पार्वती घाटी में वासुकी झील और लाहौल-स्पीति की गिपांग झील जैसे क्षेत्रों में, जो समुद्र तल से 14,770 फीट और 13,000 फीट की ऊंचाई पर हैं, वैज्ञानिक यह विश्लेषण करेंगे कि झीलें फटने की स्थिति में बाढ़ का स्तर कितना होगा। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) ने चार उच्च जोखिम वाली झीलों की पहचान की है, जिससे इनका वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक हो गया है। इसके साथ ही, अर्ली वार्निंग सिस्टम विकसित करने की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी। वैज्ञानिकों के अनुसार, 2022 तक इन झीलों की सेटेलाइट आधारित स्थिति का रिकॉर्ड उपलब्ध है, और इस अध्ययन के दौरान आकार और स्वरूप में हुए बदलावों का आकलन भी किया जाएगा। यह अध्ययन राज्य सरकार को रिपोर्ट के रूप में प्रस्तुत किया जाएगा, जिससे भविष्य में संभावित आपदाओं से निपटने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की जा सके।
Advertisement
In-Article Ad
यह अध्ययन स्थानीय निवासियों को संभावित बाढ़ और आपदाओं से सुरक्षित रखने में मदद करेगा।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि हिमाचल प्रदेश में ग्लेशियर झीलों का अध्ययन आवश्यक है?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।



