स्टारलिंक की भारत में एंट्री: डिजिटल क्रांति या सुरक्षा की चुनौती?
स्टारलिंक की भारत में दस्तक, डिजिटल क्रांति या सुरक्षा के लिए नई चुनौती?
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
स्टारलिंक, जो 2021 से भारत में सेवाएं शुरू करने की योजना बना रहा है, ने मेघालय सरकार के साथ समझौता किया है। हालांकि, सुरक्षा चिंताओं के चलते इसके संचालन पर सवाल उठाए जा रहे हैं, खासकर अमेरिका के निगरानी कानूनों और तकनीकी जोखिमों के संदर्भ में।
- 01स्टारलिंक ने मेघालय सरकार के साथ लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए हैं।
- 02सुरक्षा चिंताओं के कारण पाकिस्तान और बोलिविया जैसे देशों ने इसे अनुमति नहीं दी।
- 03आईटी विशेषज्ञों का कहना है कि सैटेलाइट इंटरनेट में हैकिंग का जोखिम अधिक है।
- 04अमेरिकी निगरानी कानून भारत में डेटा सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है।
- 05स्टारलिंक दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंचाने का वादा करता है।
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स्टारलिंक, जो कि सैटेलाइट ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा प्रदान करता है, ने 2021 से भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने की इच्छा जताई है। हाल ही में, मेघालय सरकार ने इस कंपनी के साथ एक लेटर ऑफ इंटेंट पर हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि, सुरक्षा को लेकर कई चिंताएं हैं। पाकिस्तान और बोलिविया जैसे देशों ने सुरक्षा कारणों से स्टारलिंक को अपने यहां ऑपरेशन की अनुमति नहीं दी है। भारतीय विशेषज्ञों का मानना है कि लॉ ऑर्बिट सैटेलाइट्स में हैकिंग का खतरा अधिक होता है। आईटी एक्सपर्ट कनिष्क गौर ने कहा कि रूस-यूक्रेन युद्ध में स्टारलिंक पर पहला हमला हुआ था, जो इसकी सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। इसके अलावा, अमेरिकी निगरानी कानून जैसे Foreign Intelligence Surveillance Act (FISA) भारत में डेटा सुरक्षा के लिए एक और चुनौती है। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि वह ऐसे सिस्टम्स को सही तरीके से नियामित कर सके। वहीं, दूसरी ओर, स्टारलिंक का दावा है कि यह दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने में मदद करेगा।
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स्टारलिंक की सेवाएं दूरदराज के क्षेत्रों में इंटरनेट पहुंचाने में मदद कर सकती हैं, जिससे स्थानीय लोगों को डिजिटल सुविधाएं मिलेंगी।
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