अनंतनाग के परिवार की 30 साल पुरानी न्याय की खोज, मुआवजा मामला केंद्रीय सूचना आयोग तक पहुंचा
'कश्मीरी हिंदुओं के हत्यारों को सामने लाए सरकार', 30 साल बाद भी न्याय की तलाश कर रहा अनंतनाग का यह परिवार
Jagran-1775260236398.webp)
Image: Jagran
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के एक परिवार ने 1992 में आतंकवाद से हुए संपत्ति के नुकसान के लिए मुआवजे की मांग की है। यह मामला अब केंद्रीय सूचना आयोग में है, जहां परिवार जानना चाहता है कि स्वीकृत राहत राशि का वितरण किसने किया।
- 011992 में आतंकवाद से हुए नुकसान के लिए मुआवजा नहीं मिला
- 02परिवार की दूसरी पीढ़ी अब मामले को आगे बढ़ा रही है
- 03केंद्रीय सूचना आयोग में मामला पहुंचा
- 04अधिकारियों की अनुपस्थिति से सुनवाई में बाधा
- 05परिवार ने उच्च न्यायालय में भी याचिका दायर की थी
Advertisement
In-Article Ad
दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले के वेरीनाग क्षेत्र में एक कश्मीरी परिवार, जो 1992 में आतंकवाद से प्रभावित हुआ था, ने मुआवजे के लिए केंद्रीय सूचना आयोग में मामला दायर किया है। प्राणनाथ, परिवार के सदस्य, ने बताया कि उनकी संपत्ति, जिसमें तीन मंजिला मकान और गौशाला शामिल था, आतंकवादी घटना में नष्ट हो गई थी। उन्होंने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी मांगी है कि स्वीकृत राहत राशि का वितरण किसने किया। दस्तावेजों के अनुसार, उस समय 44,500 रुपये की राशि स्वीकृत की गई थी, लेकिन परिवार को अब तक कोई भुगतान नहीं मिला है। मुख्य सूचना आयुक्त राज कुमार गोयल ने कहा कि संबंधित अधिकारी की अनुपस्थिति के कारण मामले की सुनवाई में बाधा आई है। यह मामला एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चले आ रहे संघर्ष को दर्शाता है, और परिवार अब यह जानना चाहता है कि क्या राहत राशि वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंची।
Advertisement
In-Article Ad
यह मामला कश्मीरी हिंदुओं के लिए न्याय की लंबी प्रक्रिया को उजागर करता है और यह दर्शाता है कि कैसे एक परिवार की पीढ़ी दर पीढ़ी संघर्ष कर रही है।
Advertisement
In-Article Ad
Reader Poll
क्या आपको लगता है कि सरकार को कश्मीरी हिंदुओं के लिए मुआवजा वितरण की प्रक्रिया को सुधारना चाहिए?
Connecting to poll...
मूल लेख पढ़ें
पूरी कहानी के लिए मूल स्रोत पर जाएं।




