हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक, डॉक्टरों की कमी बनी चुनौती
हिमाचल में मेडिकल कॉलेज तो बढ़े पर सुविधाएं नहीं, यहां एक टेस्ट के लिए डेढ़ वर्ष का इंतजार; डाक्टरों की भी कमी
Jagran
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हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य ढांचे का विस्तार हुआ है, लेकिन डॉक्टरों और सुविधाओं की कमी गंभीर समस्या बनी हुई है। राज्य के सबसे बड़े अस्पताल में मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
- 01हिमाचल प्रदेश में मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़ी, लेकिन सुविधाएं नहीं बढ़ीं।
- 02राज्य के अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी 700 से 800 के बीच है।
- 03विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी सबसे अधिक स्त्री रोग, एनेस्थीसिया और रेडियोलाजी में है।
- 04बड़े अस्पतालों पर मरीजों का दबाव 2 से 3 गुना बढ़ गया है।
- 05स्वास्थ्य मंत्री ने स्टाफ की कमी को पूरा करने का आश्वासन दिया।
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हिमाचल प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जहां मेडिकल कॉलेजों की संख्या में वृद्धि के बावजूद डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी बनी हुई है। राज्य के सबसे बड़े अस्पताल, इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल, में रोजाना लगभग तीन हजार मरीज इलाज के लिए आते हैं, लेकिन यहां ओपीडी में लंबी कतारें और बिस्तरों की कमी आम है। प्रदेश में डॉक्टरों के पदों में 20 से 40 प्रतिशत रिक्तता है, जिससे विशेषकर स्त्री रोग, एनेस्थीसिया और रेडियोलाजी विभागों में गंभीरता बढ़ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी खराब है, जहां कई केंद्रों पर नियमित डॉक्टर उपलब्ध नहीं हैं। मरीजों को आवश्यक जांचों के लिए निजी लैब में जाना पड़ता है, और कई मामलों में एमआरआई और सीटी स्कैन के लिए महीनों का इंतजार करना पड़ता है। स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल ने कहा कि स्टाफ की कमी को पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें।
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स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है, जिससे उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
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