ईरान-अमेरिका युद्धविराम का भारत पर प्रभाव: उद्योग जगत की प्रतिक्रिया
ईरान-US का सीजफायर भारत के लिए कितनी राहत लेकर आया... PHDCCI के CEO ने NDTV को बताया
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ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम के बाद, भारत सहित एशिया के स्टॉक मार्केट्स में तेजी आई है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत को राहत मिली है, जहां कच्चा तेल का 85% आयात किया जाता है। उद्योग जगत ने इस स्थिति का स्वागत किया है और उत्पादन में सुधार की उम्मीद जताई है।
- 01ईरान और अमेरिका के बीच 40 दिन के युद्ध के बाद युद्धविराम का ऐलान हुआ।
- 02कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से गिरकर 90-92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आईं।
- 03भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात करता है।
- 04उद्योग जगत ने युद्धविराम के बाद ऊर्जा उत्पादों की सप्लाई में सुधार की उम्मीद जताई है।
- 05PHDCCI के CEO रंजीत मेहता ने औद्योगिक उत्पादन में सुधार की संभावना पर जोर दिया।
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ईरान और अमेरिका के बीच 40 दिन तक चले युद्ध के बाद युद्धविराम की घोषणा ने वैश्विक बाजारों में सकारात्मक प्रभाव डाला है। बुधवार को भारत समेत एशिया के सभी प्रमुख स्टॉक मार्केट्स में तेजी देखी गई। कच्चे तेल की कीमतें भी गिरकर 90 से 92 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुँच गई हैं, जबकि पहले यह कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर थी। भारत, जो अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात करता है, को इस गिरावट से राहत मिली है। PHDCCI के CEO रंजीत मेहता ने बताया कि युद्धविराम के बाद ऊर्जा उत्पादों की सप्लाई में सुधार की उम्मीद है और यह औद्योगिक उत्पादन में भी सुधार ला सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में कार्गो जहाजों की आवाजाही फिर से शुरू होना एक महत्वपूर्ण कदम है।
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कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत के तेल आयात का खर्च कम होगा, जिससे उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी।
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