बॉम्बे हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: पत्नी को रसोई में जाने से रोकना मानसिक यातना है
पत्नी को रसोई में जाने से रोकना, क्या अपराध... जानें- बॉम्बे हाई कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में क्या कहा
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बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में कहा है कि पत्नी को रसोई में जाने से रोकना और उसे बाहर से खाना लाने के लिए मजबूर करना मानसिक क्रूरता का रूप है। यह निर्णय एक महिला की शिकायत पर आधारित है, जिसने अपने पति पर घरेलू उत्पीड़न का आरोप लगाया था।
- 01पत्नी को रसोई में जाने से रोकना मानसिक यातना है।
- 02अदालत ने पति के खिलाफ उत्पीड़न के आपराधिक आरोपों को रद्द करने से इनकार किया।
- 03महिला ने अपने अधिकारों के उल्लंघन की शिकायत की थी।
- 04अदालत ने पति के तर्क को खारिज किया कि यह झूठी शिकायत है।
- 05यह फैसला विवाहित जीवन में व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा के उल्लंघन को स्पष्ट करता है।
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बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा कि पत्नी को रसोई में जाने से रोकना और उसे बाहर से खाना लाने के लिए मजबूर करना मानसिक यातना का एक रूप है। यह निर्णय एक महिला की शिकायत पर आधारित है, जिसने अपने पति पर घरेलू उत्पीड़न का आरोप लगाया। अदालत ने पति के खिलाफ दायर उत्पीड़न के आपराधिक आरोपों को रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि लगातार परेशान करना और घर की बुनियादी ज़रूरतों से वंचित करना मानसिक क्रूरता के उदाहरण हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल सास होने के कारण किसी को आरोपी नहीं बनाया जा सकता। यह फैसला एक कड़ा संदेश देता है कि विवाहित जीवन में रसोई में प्रवेश करने का अधिकार केवल घरेलू नियम नहीं, बल्कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता और गरिमा का उल्लंघन है।
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इस फैसले से घरेलू हिंसा के मामलों में महिलाओं के अधिकारों की रक्षा को मजबूती मिलेगी।
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