मध्य प्रदेश में झूठा दुष्कर्म मामला दर्ज कराने वाली महिला को 10 साल की सजा
दुष्कर्म का झूठा मामला दर्ज कराने वाली महिला को 10 साल की सजा, विशेष न्यायाधीश ने आरोपित को दोषमुक्त किया
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Image: Jagran
मध्य प्रदेश के दतिया जिले की एक महिला को झूठा दुष्कर्म मामला दर्ज कराने पर 10 साल की कठोर सजा सुनाई गई है। विशेष न्यायाधीश ने आरोपित को दोषमुक्त करते हुए कहा कि झूठे मामलों की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो न्यायिक प्रक्रिया और समाज में न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास को बढ़ाती है।
- 01महिला को 10 साल की सजा और ₹10,500 का अर्थदंड
- 02विशेष न्यायाधीश ने आरोपित को दोषमुक्त किया
- 03झूठे मामलों की प्रवृत्ति पर चिंता जताई गई
- 04महिला ने रुपये के लेनदेन के विवाद के चलते झूठा मामला दर्ज कराया
- 05नए मामले के लिए महिला के खिलाफ कार्रवाई की गई
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मध्य प्रदेश के दतिया जिले में एक महिला को झूठा दुष्कर्म मामला दर्ज कराने के लिए 10 साल की कठोर सजा सुनाई गई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश राजेश भंडारी ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाया। महिला ने आरोप लगाया था कि उसके पड़ोसी ने 22 सितंबर 2021 की रात उसके साथ दुष्कर्म किया। हालांकि, सुनवाई के दौरान महिला अपने बयान से मुकर गई और अदालत में स्वीकार किया कि उसने रुपये के लेनदेन के विवाद के कारण झूठा मामला दर्ज कराया था। इस खुलासे के बाद न्यायाधीश ने आरोपित को दोषमुक्त कर दिया और महिला के खिलाफ झूठे मामले के लिए कार्रवाई के आदेश दिए। अदालत ने महिला को भारतीय दंड संहिता की धारा 182, 195 और 211 के तहत दोषी ठहराया। न्यायालय ने कहा कि झूठे मामलों की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करती है और समाज में न्याय व्यवस्था के प्रति अविश्वास को बढ़ाती है।
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यह फैसला न्यायिक प्रणाली में झूठे मामलों के खिलाफ एक सख्त संदेश भेजता है, जो समाज में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास को बढ़ा सकता है।
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