महिलाओं की नौकरी और तनख्वाह में असमानता: आंकड़े बताते हैं सच्चाई
नौकरी मिलती नहीं, मिल भी गई तो पुरुषों से कम तनख्वाह.... अब भी 'बराबरी के हक' के लिए लड़ती महिलाएं
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भारत में महिलाओं की नौकरी और तनख्वाह में भारी असमानता है। केंद्र सरकार के पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे के अनुसार, पुरुषों का लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 59.1% है जबकि महिलाओं का केवल 30.7% है। इसके अलावा, महिलाओं की औसत आय पुरुषों की तुलना में लगभग ₹6,000 कम है।
- 01महिलाओं का लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट 30.7% है, जो पुरुषों के 59.1% से काफी कम है।
- 02महिलाओं की औसत आय ₹18,353 है, जबकि पुरुषों की औसत आय ₹24,217 है।
- 03शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की बेरोजगारी दर 6.4% है, जो पुरुषों की 4.2% से अधिक है।
- 04दिहाड़ी मजदूरी में भी महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम भुगतान मिलता है।
- 05महिलाओं की खुद का काम करने की औसत आय ₹6,374 है, जबकि पुरुषों की ₹17,914 है।
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भारत में महिलाओं की नौकरी और तनख्वाह में असमानता एक गंभीर मुद्दा है। केंद्र सरकार के पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) के अनुसार, 2025 में पुरुषों का लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट (LFPR) 59.1% है, जबकि महिलाओं का केवल 30.7% है। यह दर्शाता है कि हर 10 में से 6 पुरुष काम कर रहे हैं या काम की तलाश में हैं, जबकि महिलाओं की संख्या केवल 3 है। इसके अलावा, पुरुषों की औसत आय ₹24,217 है, जबकि महिलाओं की औसत आय ₹18,353 है, जो कि लगभग ₹6,000 का अंतर है। शहरी क्षेत्रों में महिलाओं की बेरोजगारी दर 6.4% है, जो पुरुषों की 4.2% से अधिक है। दिहाड़ी मजदूरी में भी महिलाओं को पुरुषों की तुलना में कम भुगतान मिलता है, जहां पुरुषों को औसतन ₹455 मिलते हैं, वहीं महिलाओं को केवल ₹315 मिलते हैं। यह सभी आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि महिलाओं को काम और तनख्वाह में समानता की आवश्यकता है।
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महिलाओं को रोजगार और समान वेतन की कमी का सामना करना पड़ता है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती है।
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