तलाक के समय गहनों और उपहारों का अधिकार: जानें स्त्रीधन के नियम
Divorce Rule: तलाक के समय गहने और उपहारों पर किसका हक होता है? जानें नियम
Amar Ujala
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तलाक के दौरान गहनों और उपहारों के अधिकार को लेकर भारतीय कानून में 'स्त्रीधन' की अवधारणा है। यह नियम सुनिश्चित करता है कि शादी के दौरान मिले उपहार और संपत्ति महिला की निजी संपत्ति माने जाते हैं। यदि पति या ससुराल वाले गहने लौटाने में विफल रहते हैं, तो इसे आपराधिक विश्वासघात माना जा सकता है।
- 01स्त्रीधन में महिला को मिले सभी उपहार शामिल होते हैं।
- 02पति केवल स्त्रीधन का संरक्षक होता है, मालिक नहीं।
- 03गहनों की वापसी न करने पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
- 04तलाक के दौरान संपत्ति का बंटवारा निवेश के अनुपात में होता है।
- 05गहनों की सूची और रसीदें रखना महत्वपूर्ण है।
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तलाक की प्रक्रिया में संपत्ति और गहनों का बंटवारा अक्सर विवाद का कारण बनता है। भारतीय कानून के अनुसार, 'स्त्रीधन' वह संपत्ति है जो महिला को शादी के दौरान उपहार स्वरूप मिलती है। इसमें माता-पिता, रिश्तेदारों या पति द्वारा दिए गए गहने, कपड़े और नकदी शामिल हैं। तलाक के समय, पत्नी का स्त्रीधन पर पूर्ण अधिकार होता है, जबकि पति केवल इसका संरक्षक होता है। यदि पति या ससुराल वाले गहने लौटाने में विफल रहते हैं, तो यह 'अमानत में ख्यानत' के तहत आपराधिक मामला बन सकता है। इसके अलावा, तलाक के दौरान यदि संपत्ति दोनों के नाम पर है, तो उसका बंटवारा निवेश के अनुपात में किया जाएगा। इसलिए, यह महत्वपूर्ण है कि महिलाएं शादी में मिले गहनों की सूची और रसीदें सुरक्षित रखें ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी विवाद से बचा जा सके।
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यह नियम महिलाओं को तलाक के समय अपने अधिकारों की रक्षा करने में मदद करता है।
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