लखनऊ में रेलवे का सफर: भाप इंजन से बुलेट ट्रेन तक
भाप इंजन से शुरुआत और अब बुलेट ट्रेन की दस्तक, लखनऊ तक ट्रेन नेटवर्क पहुंचने में लग गए थे 14 साल
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Image: Jagran
लखनऊ, उत्तर प्रदेश में रेलवे का सफर 1853 में भाप इंजन से शुरू हुआ था और अब बुलेट ट्रेन की योजना भी बन चुकी है। 14 साल के भीतर लखनऊ को रेलवे नेटवर्क से जोड़ा गया था, और अब दिल्ली से लखनऊ होते हुए वाराणसी तक बुलेट ट्रेन चलाने की घोषणा की गई है।
- 01लखनऊ का रेलवे नेटवर्क 1853 में भाप इंजन से शुरू हुआ।
- 02लखनऊ को रेलवे से जोड़ने में 14 साल लगे थे।
- 03बुलेट ट्रेन की योजना में दिल्ली से लखनऊ और वाराणसी शामिल हैं।
- 04लखनऊ में रेलवे स्टेशन का निर्माण 1925 में हुआ था।
- 05भारतीय यात्रियों के लिए प्रथम श्रेणी बोगियों की शुरुआत 1873-75 में हुई।
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लखनऊ, उत्तर प्रदेश में रेलवे का सफर 16 अप्रैल 1853 को भाप इंजन से शुरू हुआ, जब पहली बार ट्रेन ठाणे से मुंबई के बीच दौड़ी। 14 साल के भीतर, 23 अप्रैल 1867 को लखनऊ को कानपुर से जोड़ने वाली रेल सेवा शुरू की गई। इसके बाद, लखनऊ ने कई महत्वपूर्ण रेलवे विकास देखे, जैसे तेजस एक्सप्रेस और वंदे भारत एक्सप्रेस। हाल ही में आम बजट में बुलेट ट्रेन की योजना की घोषणा की गई है, जिसमें दिल्ली से लखनऊ होकर वाराणसी तक बुलेट ट्रेन चलाने की बात की गई है। लखनऊ में रेलवे का मुख्यालय अवध रुहेलखंड रेलवे (ओआरआर) था, जिसकी स्थापना 1857 में हुई थी। इसने लखनऊ को अन्य शहरों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1925 में लखनऊ रेलवे स्टेशन का निर्माण हुआ, जहाँ महात्मा गांधी और पंडित नेहरू की पहली मुलाकात हुई थी।
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बुलेट ट्रेन की योजना से लखनऊ के यात्रियों को तेज और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा, जिससे यात्रा का समय कम होगा और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
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