आरती: पूजा का महत्वपूर्ण हिस्सा और इसकी विधि
Aarti: पूजा के अंत में आखिर क्यों की जाती है आरती? जानें इसकी सही विधि और धार्मिक महत्व
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आरती हिंदू पूजा का एक अनिवार्य हिस्सा है, जिसे देवी-देवताओं की पूजा के बाद किया जाता है। इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ किया जाता है, और इसकी सही विधि जानना आवश्यक है। आरती खड़े होकर करने का महत्व भी है, जो आस्था और सम्मान का प्रतीक है।
- 01आरती पूजा का अनिवार्य हिस्सा है, जो देवी-देवताओं की साधना को संपूर्ण बनाती है।
- 02आरती करने के लिए आवश्यक सामग्री में दीपक, कपूर, पुष्प और आरती की पुस्तक शामिल हैं।
- 03आरती को हमेशा घड़ी की दिशा में घुमाना चाहिए और श्रद्धा से गाना चाहिए।
- 04आरती खड़े होकर करने की परंपरा है, जो सम्मान और आस्था का प्रतीक है।
- 05आरती के बाद शुद्ध जल छिड़कना और ज्योति को माथे से लगाना महत्वपूर्ण है।
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आरती हिंदू धर्म में पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे देवी-देवताओं की साधना के बाद किया जाता है। इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ गाया जाता है, और मान्यता है कि यह पूजा के पुण्यफल को पूर्ण करता है। आरती करने के लिए आवश्यक सामग्री में एक प्लेट, दीपक, शुद्ध घी, कपूर, पुष्प और आरती की पुस्तक शामिल हैं। आरती को घड़ी की दिशा में चार बार अपने आराध्य के चरणों में, फिर नाभि के पास और अंत में देवी या देवता के सम्मुख करना चाहिए। आरती खड़े होकर करने की परंपरा है, जो सम्मान और आस्था का प्रतीक है। आरती के बाद शुद्ध जल का छिड़काव और ज्योति को माथे से लगाना भी महत्वपूर्ण है।
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