बिहार की राजनीति में जातिवाद का प्रभाव: विजय सिन्हा का भविष्य अंधकार में
बिहार की सियासत में योग्यता पर भारी 'जाति का गणित', विजय सिन्हा CM तो बने नहीं, डिप्टी सीएम पद भी हाथ से गया
Nbt NavbharattimesImage: Nbt Navbharattimes
बिहार की राजनीति में जातिवाद का प्रभाव स्पष्ट हो रहा है, जहां विजय कुमार सिन्हा (राजस्व और भूमि सुधार मंत्री) को मुख्यमंत्री या डिप्टी सीएम पद नहीं मिला। उनकी ईमानदारी और कार्यकुशलता के बावजूद जातिगत समीकरणों ने उनकी राजनीतिक संभावनाओं को प्रभावित किया है।
- 01जातिवाद का प्रभाव बिहार की राजनीति में गहरा है।
- 02विजय कुमार सिन्हा की ईमानदारी और कार्यकुशलता के बावजूद उन्हें पद नहीं मिला।
- 03सम्राट चौधरी ने भाजपा का मुख्यमंत्री पद हासिल किया।
- 04भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है।
- 05जदयू ने अति पिछड़ा वर्ग को प्राथमिकता दी, जिससे भाजपा को नुकसान हो सकता है।
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बिहार की राजनीति में जातिवाद का गहरा प्रभाव देखने को मिल रहा है, जहां विजय कुमार सिन्हा (राजस्व और भूमि सुधार मंत्री) को मुख्यमंत्री या उपमुख्यमंत्री पद नहीं मिल पाया। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ मजबूत लड़ाई लड़ी, लेकिन जातिगत समीकरणों के कारण उनकी राजनीतिक संभावनाएं धूमिल हो गई हैं। सम्राट चौधरी, जो राजद से आए हैं, भाजपा के मुख्यमंत्री बन गए हैं, जबकि विजय सिन्हा को दरकिनार कर दिया गया। इससे भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ रहा है, और एक किसान ने जदयू की राजनीति की सराहना की है। जदयू ने अति पिछड़ा वर्ग को प्राथमिकता दी, जिससे भाजपा को नुकसान हो सकता है। अब सवाल यह है कि क्या विजय सिन्हा मंत्री पद स्वीकार करेंगे और क्या वे पहले की तरह प्रभावी रह पाएंगे।
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इस स्थिति से भाजपा के पुराने कार्यकर्ताओं में असंतोष बढ़ सकता है, जिससे भविष्य में पार्टी को राजनीतिक नुकसान हो सकता है।
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