हिमाचल में निर्विरोध पंचायत चुनावों के लिए वित्तीय विकल्पों पर चर्चा
हिमाचल: निर्विरोध चुनी गईं पंचायतों के लिए पैसा देने के लिए विभाग ने सरकार को सुझाए तीन विकल्प
Amar Ujala
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हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को निर्विरोध कराने के लिए सरकार को तीन वित्तीय विकल्प सुझाए गए हैं। इनमें प्रोत्साहन राशि बढ़ाना, पंचायतों को 10 लाख रुपये की मौजूदा व्यवस्था जारी रखना और चुनावी खर्चों को कम करने के उपाय शामिल हैं। अंतिम निर्णय राज्य सरकार को लेना है।
- 01पंचायत चुनावों में निर्विरोध चुनाव को बढ़ावा देने के लिए तीन वित्तीय विकल्प सुझाए गए हैं।
- 02प्रोत्साहन राशि बढ़ाने से चुनावी खर्च और विवादों में कमी आएगी।
- 03पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव में शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता नहीं होगी।
- 04राज्य निर्वाचन आयोग ने 16 अप्रैल को चुनावी तैयारियों की बैठक बुलाई है।
- 05नई गाइडलाइन में मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी निगरानी का सुझाव दिया जा सकता है।
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हिमाचल प्रदेश में पंचायत चुनावों को निर्विरोध कराने के लिए पंचायत विकास विभाग ने सरकार को तीन वित्तीय विकल्प सुझाए हैं। पहला विकल्प प्रोत्साहन राशि बढ़ाना है, जिससे अधिक पंचायतें निर्विरोध चुनी जा सकेंगी। दूसरा विकल्प मौजूदा व्यवस्था को जारी रखना है, जिसमें पंचायतों को 10 लाख रुपये दिए जाते हैं। विभाग का मानना है कि यह मॉडल पहले से प्रभावी रहा है। तीसरा विकल्प चुनावी खर्च को कम करने के उपायों का सुझाव देना है। इन विकल्पों के फायदे और संभावित प्रभावों का भी उल्लेख किया गया है। अंत में, निर्णय राज्य सरकार को लेना है, जो वित्तीय स्थिति और पंचायतों की संख्या के आधार पर जल्द ही फैसला कर सकती है। इसके अलावा, राज्य निर्वाचन आयोग ने 16 अप्रैल को सभी जिलों के उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों की बैठक बुलाई है, जिसमें चुनावी तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने के लिए नई गाइडलाइन भी जारी की जा सकती हैं।
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यदि प्रोत्साहन राशि बढ़ाई जाती है, तो यह पंचायत चुनावों को निर्विरोध कराने में मदद कर सकती है, जिससे चुनावी खर्च और विवादों में कमी आएगी।
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