लीची किसानों के लिए कीट प्रकोप से बचाव के उपाय
लीची किसानों को सलाह, कीट से बचाव के लिए गुच्छों का करें थैलीकरण
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लीची उत्पादक किसानों को फलों की सुरक्षा के लिए थैलीकरण (बैगिंग) करने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपाय कीटों के हमले और फलों के जलने की समस्या से बचाने में मददगार है। कार्यक्रम में वैज्ञानिकों ने उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर भी जोर दिया।
- 01लीची के गुच्छों का थैलीकरण कीटों से बचाव में मददगार है।
- 02अप्रैल में थैलीकरण करने से फलों के जलने की समस्या कम होती है।
- 03उर्वरकों का संतुलित उपयोग फसल की गुणवत्ता के लिए आवश्यक है।
- 04कीट नियंत्रण के उपायों से उत्पादन में सुधार संभव है।
- 05किसानों को वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने की सलाह दी गई है।
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मुजफ्फरपुर में लीची उत्पादक किसानों के लिए एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें विशेषज्ञों ने फलों की सुरक्षा के लिए थैलीकरण (बैगिंग) करने की सलाह दी। वैज्ञानिक डॉ. सुनील कुमार ने बताया कि अप्रैल में गुच्छों का थैलीकरण करने से कीटों के हमले से बचाव संभव है और इससे फलों के जलने की समस्या भी कम होती है। डॉ. प्रभात कुमार ने संतुलित उर्वरक उपयोग की आवश्यकता पर जोर दिया, जबकि डॉ. इप्सिता सामल ने कीट नियंत्रण के उपायों के बारे में जानकारी दी। कार्यक्रम में स्थानीय किसानों ने आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया, जिससे न केवल फसल की गुणवत्ता बढ़ेगी, बल्कि मिट्टी का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।
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इस सलाह के माध्यम से किसान अपनी लीची की फसल को बेहतर तरीके से सुरक्षित रख सकते हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो सकती है।
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