सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ की वैधता पर केंद्र से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के प्रावधानों के खिलाफ याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा
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सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए केंद्र सरकार से जवाब मांगा। याचिका में कहा गया है कि शरीयत के उत्तराधिकार नियम महिलाओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण हैं।
- 01सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ के प्रावधानों की वैधता पर सुनवाई के लिए केंद्र से जवाब मांगा।
- 02याचिका में शरीयत के उत्तराधिकार नियमों को महिलाओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण बताया गया।
- 03वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि महिलाओं के संपत्ति अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
- 04चीफ जस्टिस ने कहा कि समान नागरिक संहिता का विचार संवैधानिक महत्वाकांक्षा है।
- 05सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत कानूनों में हस्तक्षेप करना संसद का अधिकार है।
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सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) के कुछ प्रावधानों की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई करने का निर्णय लिया है। इस मामले में केंद्र सरकार के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय से जवाब मांगा गया है। याचिका में वकील प्रशांत भूषण ने तर्क दिया कि शरीयत के उत्तराधिकार नियम महिलाओं के खिलाफ भेदभावपूर्ण हैं और यह संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के संपत्ति अधिकार किसी धर्म की अनिवार्य धार्मिक प्रथा नहीं हो सकते। चीफ जस्टिस ने समान नागरिक संहिता के महत्व को स्वीकार किया और कहा कि व्यक्तिगत कानूनों में हस्तक्षेप करना संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है। सुनवाई के दौरान, उन्होंने यह भी कहा कि प्रभावित व्यक्तियों की आवाज सुनी जानी चाहिए।
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इस मामले का निर्णय मुस्लिम महिलाओं के संपत्ति अधिकारों और समानता के अधिकार पर प्रभाव डाल सकता है।
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