महिला आरक्षण के लिए विकल्पों पर विचार, 2029 में लागू होने की संभावना
2029 में महिला आरक्षण लागू करने के रास्ते अभी बंद नहीं, सरकार कर रही है विकल्पों पर विचार
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महिला आरक्षण लागू करने के लिए संविधान संशोधन बिल लोक सभा में गिरने के बावजूद 2029 के चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का रास्ता खुला है। सरकार विभिन्न विकल्पों पर विचार कर रही है, जिसमें परिसीमन और राजनीतिक सहमति शामिल हैं।
- 01महिला आरक्षण के लिए संविधान संशोधन बिल गिरा, लेकिन रास्ता बंद नहीं हुआ।
- 02सरकार 2029 में 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने के लिए विकल्पों पर विचार कर रही है।
- 03जनगणना और परिसीमन की प्रक्रिया 2027 तक पूरी होने की संभावना है।
- 04सरकार को संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी।
- 05विपक्षी दल जनसंख्या के आधार पर परिसीमन पर आपत्ति कर रहे हैं।
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महिला आरक्षण को लागू करने के लिए संविधान संशोधन बिल लोक सभा में गिरने के बावजूद, 2029 के लोक सभा चुनाव में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का रास्ता अभी भी खुला हुआ है। सरकार इस दिशा में कई विकल्पों पर विचार कर रही है। सूत्रों के अनुसार, मोदी सरकार इस आरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है और सभी राजनीतिक दलों से चर्चा करेगी। यदि जनगणना 2027 तक पूरी होती है, तो उसके बाद परिसीमन आयोग का गठन करके 2029 के चुनाव में आरक्षण लागू किया जा सकता है। हालांकि, इसके लिए सरकार को संसद में दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। विपक्षी दलों ने जनसंख्या के आधार पर परिसीमन पर आपत्ति जताई है, जो कि 131वें संविधान संशोधन बिल के गिरने का एक प्रमुख कारण था। सरकार के पास अनुच्छेद 334A में संशोधन करने का विकल्प भी है, जिससे आरक्षण को परिसीमन की शर्त से अलग किया जा सकेगा। इस प्रकार, महिला आरक्षण को लागू करने के लिए सरकार के पास कई विकल्प हैं।
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यदि महिला आरक्षण लागू होता है, तो यह महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व को बढ़ाएगा और समाज में समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा।
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